
वाराणसी के सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित मंदिरों में से एक, संकट मोचन हनुमान मंदिर, पूरी तरह से भगवान हनुमान को समर्पित है। यहाँ आने वाले भक्तों का एक सरल लेकिन गहरा विश्वास है—कि बजरंगबली के दर्शन मात्र से उनके जीवन की परेशानियाँ (संकट) दूर हो जाएँगी और मन हल्का महसूस करेगा।
यह मंदिर गोस्वामी तुलसीदास जी से गहराई से जुड़ा हुआ है। समय के साथ, यह वाराणसी के स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले पर्यटकों, दोनों के लिए एक अनिवार्य आध्यात्मिक पड़ाव बन गया है। इस गाइड में आपको अपनी यात्रा से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी—जैसे मंदिर का समय, आरती का शेड्यूल, इतिहास, प्रमुख त्यौहार और कुछ ऐसे व्यावहारिक सुझाव जो आपकी यात्रा को बिना किसी उलझन के सफल बनाएंगे।
संकट मोचन हनुमान मंदिर: समय और आरती का विवरण
वाराणसी के इस पवित्र मंदिर में दर्शन और दैनिक आरती के लिए नीचे दिया गया समय सारणी (Timetable) देखें:
| दिन | मंदिर खुलने का समय | मंदिर बंद होने का समय | आरती / अनुष्ठान | आरती का समय |
| सोमवार | 5:00 AM | 10:00 PM | मंगला आरती | 5:00 AM |
| मंगलवार | 5:00 AM | 10:00 PM | हनुमान चालीसा एवं भजन | 8:00 AM |
| बुधवार | 5:00 AM | 10:00 PM | संध्या आरती | 8:30 PM |
| गुरुवार | 5:00 AM | 10:00 PM | मंगला आरती | 5:00 AM |
| शुक्रवार | 5:00 AM | 10:00 PM | हनुमान चालीसा एवं भजन | 8:00 AM |
| शनिवार | 5:00 AM | 10:00 PM | संध्या आरती | 8:30 PM |
| रविवार | 5:00 AM | 10:00 PM | मंगला आरती | 5:00 AM |
विशेष नोट: हनुमान जयंती और बड़े त्यौहारों के अवसर पर मंदिर के समय में बदलाव हो सकता है।
आमतौर पर मंदिर रोजाना सुबह 5:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुला रहता है। मंगलवार और शनिवार जैसे विशेष दिनों पर भीड़ को संभालने के लिए मंदिर थोड़ा जल्दी खुल सकता है और देर तक खुला रह सकता है।
- सुबह का दर्शन: सुबह (करीब 5:00 बजे) दर्शन करना सबसे अच्छा है, जब वातावरण बहुत शांत होता है।
- शाम का दर्शन: रात तक दर्शन चलते हैं, लेकिन आरती के समय श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है।
यात्रा को सफल बनाने के लिए कुछ उपयोगी टिप्स
- बेहतर अनुभव के लिए जल्दी पहुँचें: सुबह 5:00 से 8:00 बजे के बीच का समय सबसे शांतिपूर्ण होता है।
- शाम का समय भी खास है: अगर आप आरती की ऊर्जा महसूस करना चाहते हैं, तो सूर्यास्त से पहले पहुँचने की योजना बनाएं।
- मंगलवार और शनिवार की भीड़: ये दिन हनुमान जी के लिए विशेष माने जाते हैं, इसलिए इन दिनों काफी भीड़ रहती है।
- गर्मियों में दोपहर से बचें: बनारस की गर्मी में दोपहर के समय दर्शन करना काफी कष्टदायक हो सकता है।
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कैसे पहुँचें?
- हवाई मार्ग द्वारा: सबसे नजदीकी हवाई अड्डा 'लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा' (20–25 किमी) है। वहाँ से टैक्सी या ऑटो आसानी से उपलब्ध हैं।
- रेल मार्ग द्वारा: वाराणसी जंक्शन और बनारस रेलवे स्टेशन सबसे पास हैं। दोनों स्टेशन अच्छी तरह जुड़े हुए हैं और बाहर से आप कैब या ऑटो ले सकते हैं।
- सड़क मार्ग द्वारा: मंदिर वाराणसी के लंका क्षेत्र में स्थित है, जो शहर के बाकी हिस्सों से बहुत अच्छी तरह जुड़ा है। आप ऑटो या लोकल ट्रांसपोर्ट से आसानी से पहुँच सकते हैं।
भक्तों के लिए जरूरी बातें:
- सही पहनावा: मंदिर की मर्यादा के अनुसार सादे और शालीन कपड़े पहनना उचित है।
- फोन अंदर ले जाना मना है: मंदिर के भीतर मोबाइल और कैमरे ले जाने की अनुमति नहीं है। प्रवेश द्वार के पास लॉकर की सुविधा है, उसका उपयोग करें।
- प्रसाद: मंदिर के बाहर 'बेसन के लड्डू' मिलते हैं, जो यहाँ का सबसे लोकप्रिय प्रसाद है।
- बंदरों से सावधान रहें: मंदिर परिसर में बंदर और लंगूर काफी सक्रिय रहते हैं, इसलिए अपने सामान का ध्यान रखें।
- सुविधाएं: बुजुर्गों की सहायता और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं परिसर में उपलब्ध हैं।

मंदिर की वास्तुकला और बनावट
संकट मोचन हनुमान मंदिर की वास्तुकला आध्यात्मिक सादगी और सच्ची भक्ति का प्रतिबिंब है। कई भव्य और तड़क-भड़क वाले मंदिरों के विपरीत, यह स्थान अपनी विनम्रता और शांत आकर्षण से एक दिव्य वातावरण बनाता है। वाराणसी के लंका इलाके की हरियाली के बीच स्थित यह मंदिर पुराने पेड़ों से घिरा हुआ है।
मंदिर परिसर की मुख्य विशेषताएं:
- दो गर्भगृह (Twin Sanctums): मुख्य गर्भगृह में हनुमान जी की प्रतिमा ध्यान मुद्रा में विराजमान है। विशेष बात यह है कि हनुमान जी की मूर्ति का मुख ठीक सामने भगवान राम के मंदिर की ओर है, जहाँ राम, सीता और लक्ष्मण जी स्थापित हैं। यह बनावट हनुमान जी की भगवान राम के प्रति अनंत भक्ति और सेवा भाव को दर्शाती है।
- पवित्र कुआं: इन दोनों मंदिरों के बीच में एक पवित्र कुआं है, जो शुद्धि और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है।
- तीन प्रवेश द्वार: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहाँ तीन द्वार हैं—एक मुख्य द्वार (Grand Entrance), एक पारंपरिक बगल का दरवाजा (नियमित भक्तों के लिए), और एक विशिष्ट अतिथियों (VIP) व निवासियों के लिए आरक्षित मार्ग।
गर्भगृह के अंदर हनुमान जी की प्रतिमा को सिंदूर से लेपा जाता है और उन्हें पवित्र वस्त्र पहनाए जाते हैं। मंदिर की हवा हमेशा मंत्रोच्चार, घंटियों की गूंज और अगरबत्ती की खुशबू से भरी रहती है।
त्यौहार और विशेष उत्सव
त्यौहारों के दौरान मंदिर की ऊर्जा देखते ही बनती है।
- हनुमान जयंती: यह यहाँ का सबसे बड़ा उत्सव है। इस दिन अखंड पाठ, भजन और आरती का आयोजन होता है।
- राम नवमी और तुलसी जयंती: इन अवसरों पर विशेष प्रार्थनाएं और रामचरितमानस का पाठ किया जाता है।
- दिवाली और दशहरा: इन त्यौहारों पर मंदिर को दीपों से सजाया जाता है।

शास्त्रीय संगीत का अनूठा संगम
इस मंदिर की एक खास बात इसका शास्त्रीय संगीत से जुड़ाव है। हर साल अप्रैल के महीने में यहाँ 'संकट मोचन संगीत समारोह' आयोजित होता है। यहाँ कलाकार व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि हनुमान जी के प्रति अपनी सेवा के रूप में प्रदर्शन करते हैं। पंडित जसराज और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान जैसे महान कलाकारों ने यहाँ अपनी हाजिरी दी है। यह कार्यक्रम पूरी तरह निशुल्क और सबके लिए खुला होता है।
इतिहास: कैसे हुई स्थापना?
माना जाता है कि यह मंदिर 16वीं शताब्दी का है और इसका सीधा संबंध गोस्वामी तुलसीदास जी से है। कहा जाता है कि तुलसीदास जी को अस्सी नदी के किनारे हनुमान जी के दर्शन हुए थे, जिसके बाद उन्होंने इसी स्थान पर मूर्ति स्थापित की। उन्होंने ही इसका नाम "संकट मोचन" रखा। वर्तमान मंदिर का स्वरूप 20वीं सदी की शुरुआत में महामना मदन मोहन मालवीय जी के सहयोग से विकसित हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. मंदिर का समय क्या है?
सुबह 5:00 से रात 10:00 बजे तक।
2. कौन से दिन जाना सबसे अच्छा है?
शांति के लिए वर्किंग डेज (सोमवार, बुधवार आदि) बेहतर हैं, क्योंकि मंगलवार-शनिवार बहुत भीड़ होती है।
3. क्या प्रवेश शुल्क है?
नहीं, प्रवेश पूरी तरह निशुल्क है।
4. दर्शन में कितना समय लगता है?
सामान्य दिनों में 30-60 मिनट, त्यौहारों पर यह समय बढ़ सकता है।
5. क्या फोटोग्राफी की अनुमति है?
मुख्य गर्भगृह के अंदर फोटोग्राफी सख्त मना है।